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उम्मीदों के पहाड़ के साथ ओलिम्पक पदक विजेता “राठौर” ने संभाला खेल मंत्रालय

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खेलों में राजनीति और सुविधाओं की कमी होने के कारण कई खिलाड़ी वहां तक नहीं पहुंच पाते जहां तक पहुंचने के वो हकदार होते है। सरकार का रोल इसमें अहम होता है। खेल वैसे तो राज्य सरकारों का मुद्दा है, लेकिन केंद्र की भी इसमें बड़ी भूमिका रहती है।

नरेंद्र मोदी की मौजूदा केंद्र सरकार ने सोमवार को कैबिनेट का विस्तार किया तो देश को पहला ऐसा खेल मंत्री मिला जो खिलाड़ी होने के साथ-साथ ओलिम्पक पदक विजेता रहा है।

Rajyavardhan Singh Rathore
Rajyavardhan Singh Rathore

राज्यवर्धन सिंह राठौर के कंधों पर यह जिम्मेदारी तो सौंप दी गई है, लेकिन खुद राठौर भी जानते हैं कि उनके सामने कितनी विशाल चुनौतियां थोक के भाव में इंतजार कर रही हैं। जो खिलाड़ी कुछ साल पहले तक सरकार से सवाल करता रहा हो और सविधाएं न होने की बात कहता रहा हो उसके जिम्मे ही अब इन सभी समस्याओं से निपटने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

ख़बरें नहीं खिलाडी बनाने होंगे, क्या कर पाएंगे राज्यवर्धन सिंह राठौर?

सचिन जब मैदान पर उतरते थे तब अरबों लोगों की उम्मीदों का पहाड़ उनके कंधों पर होता था। कुछ यही हाल राठौर का भी है। कारण साफ है। वो एक खिलाड़ी रहे हैं। वो जानते हैं कि पदक कैसे लाए जाते हैं और खिलाड़ी कैसे बनाए जाते हैं। ऐसे में उनसे उम्मीदें दूसरे खेल मंत्रियों की अपेक्षा ज्यादा हैं। उनसे उम्मीद की जाती है कि वो खेल और खिलाड़ियों की समस्याओं को दूसरों से बेहतर समझेंगे और उन्हें दूर करेंगे। साथ ही जमीनी स्तर पर जरूरी सुधार करेंगे।

वो बखूबी जानते हैं कि कहां कमी है और क्या कमी और क्या किया जाना चाहिए इसलिए पूरा खेल जगत उन्हें टकटकी लगाए देखेगा कि वो कैसे इन चुनौतियों से निपटते हैं।

आसान नहीं होगी राठौर की राह

राठौर के कंधों पर सबसे बड़ी जिम्मेदारी 2018 में होने वाले एशियाई खेलों और राष्ट्रमंडल खेलों में देश के प्रदर्शन में सुधार है। इन दो बड़े टूनार्मेंट्स से पहले वो किस तरह देश के खिलाड़ियों की समस्याओं को दूर करते हैं और उन्हें सुविधाएं मुहैया कराने के साथ-साथ खेल का महौल बना कर देते हैं ये उनके लिए चुनौती होगा।

वैसे राठौर की सबसे बड़ी चुनौती टोक्यो में 2020 में होने वाले ओलम्पिक खेल होंगे, लेकिन उससे पहले 2019 में लोकसभा चुनाव होने हैं, ऐसे में राठौर के पास तब तक यह मंत्रालय रहे या नहीं ये कहना मुश्किल है।

लेकिन उनसे उम्मीद की जाएगी कि वह 2019 तक ओलम्पिक के लिए एक ऐसा रोडमैप बनाकर दें जिससे न सिर्फ खिलाड़ियों को फायदा हो बल्कि वो भविष्य में भी मिसाल बने। एक खिलाड़ी से मंत्री बने शख्स से इस तरह की उम्मीदें लाजमी है और उन्हें इन उम्मीदों को पूरा भी करना चाहिए।

अगर राठौर खेल मंत्री बनने के बाद इस देश को वो रणनीति या वो रोडमैप बनाकर नहीं दे पाए जिससे इस देश में खेलों की दशा सुधरे तो मुमकिन नहीं कि कोई और इस काम को कर पाएगा।

हालांकि 2019 चुनावों और उसके बाद पद पर बने रहने की अनिश्चित्ता को देखते हुए उनके पास समय ज्यादा नहीं है। लेकिन राठौर के साथ इस खेल जगत को मुनाफा ये है कि वो इस देश की खेल नीति और समस्याओं से वाकिफ है। ऐसे में उनका काम सही रणनीति बनाना और उन्हें जल्द से जल्द अमल में लाना है।

ख़बरों मे खेल मंत्रालय, जमीं पर कुछ नहीं

रठौर से पहले विजय गोयल के पास यह मंत्रालय था। उन्होंने संवाददाता सम्मेलन तो बहुत किए और उनमें कई बार कई रणनीतियों के बारे में भी बताया लेकिन हकीकत की जमीं पर कुछ खास नजर नहीं आया।

हां गोयल ऐसे मंत्री जरूर थे जो खिलाड़ियों के लिए आमतौर पर उपलब्ध रहते थे और साथ ही देश के लिए अच्छा प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों का वो स्वदेश लौटने पर सम्मान भी करते थे, लेकिन इससे ज्यादा गोयल के कार्यकाल में और कुछ खास देखने को नहीं मिला।

गोयल ने ओलम्पिक के लिए एक टास्क फोर्स का गठन भी किया था। ऐसे में गोयल के कार्यकाल के दौरान बनाई गई नीतियों की भी राठौर को अपनी पारखी नजरों से समीक्षा करनी होगी और कमी को दूर करते हुए काम करना होगा।

राठौर से उम्मीदें तो बहुत हैं। अब इस देश के खेल जगत की आगे की कहानी उन्हीं के हाथों में है। एथेंस ओलम्पिक-2004 में भारत को पदक दिलाने वाला यह निशानेबाज मंत्री होते हुए सही निशाना लगा पाता है या नहीं ये वक्त ही बताएगा।

विराट और बॉक्सर विजेंदर को कोचिंग दे चुका है गुरमीत राम रहीम

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जब किसी को यह अहसास हो जाता है कि वह जो भी करेगा और बोलेगा, उसके मानने या चाहने वाले उसे सौ आने सही मानेंगे तो अज्ञानता या फिर बड़बोलेपन के कारण वह ‘फेंकने’ की सारी सीमाएं लांघ जाता है। अब दुष्कर्म के दोषी करार दिए जा चुके डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह को ही लीजिए, इस बड़बोले बाबा ने दावा किया है कि वह भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान विराट कोहली को क्रिकेट और ओलम्पिक पदक विजेता मुक्केबाज विजेंदर सिंह को मुक्केबाजी का गुर सिखा चुका है।

gurmeet ram rahim and virat kohli

गुरमीत ने तो यह भी दावा किया है कि उसने विराट और विजेंदर के अलावा भारतीय क्रिकेट टीम के सलामी बल्लेबाज शिखर धवन, पूर्व तेज गेंदबाज जहीर खान, आशीष नेहरा, यूसुफ पठान और पाकिस्तान क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान वकार यूनुस को क्रिकेट का गुर सिखाया है।

इन दिनों सोशल मीडिया पर गुरमीत राम रहीम का एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें उसने इन दिग्गज खिलाड़ियों को कोचिंग देने की बात कही है। और सबसे मजेदार बात यह है कि इस बात से बेखबर कि दुनिया उसके बारे में क्या सोचेगी, वह बिना किसी शर्म के खुद को इन खिलाड़ियों का कोच बता रहा है।

Gurmeet Ram Rahim has given coaching to Virat kohli

यही नहीं, एक मिनट 13 सेकेंड के वीडियो में उसने यह भी कहा है कि वह 32 खेलों में महारथ रखता है। अब इतने खेलों में तो भारत ओलम्पिक में भी प्रतिनिधित्व नहीं करता है। अब इसको क्या कहेंगे।

वीडियो कब की है, यह स्पष्ट नहीं हो सका है लेकिन इसकी शुरुआत में ही गुरमीत ने कहा कि वह 32 नेशनल गेम्स खेल चुका है और कई खिलाड़ियों का कोच भी रहा है और इनमें से कई खिलाड़ी देश के लिए पदक जीत चुके हैं और कई आज भी देश का नाम रौशन कर रहे हैं।

गुरमीत ने कहा, “हम ए टू जेड कर लेते हैं। 32 नेशनल गेम ऑलरेडी हम खेले हैं। कई खिलाड़ियों के कोच भी रहे हैं। उनमें से बहुत सारे बच्चे इंडिया के लिए मेडल ला रहे हैं। विजेंदर ने मुक्केबाजी में अभी-अभी देश का नाम रोशन किया है। विराट कोहली, हमारे पास उनका वीडियो है, आप देख सकते हैं कि उन्होंने कैसे आके हमसे सीखा और आज वह देश का नाम रोशन कर रहे हैं।”

गुरमीत ने हालांकि यह भी कहा कि वह इन सभी बातों का श्रेय नहीं लेना चाहता क्योंकि उसका मानना है कि यह सब ईश्वर ने किया है। बकौल गुरमीत, “इसमें हमारी कोई बड़ाई नहीं है। यह ओम, हरि, अल्ला, राम ने किया है क्योंकि वो शक्ति देता वर्ना एक इंसान इतने काम करने के बारे में सोच भी नहीं सकता।”

gurmeet ram rahim

गुरमीत से जब यह पूछा गया कि आपने बहुत सारे खिलाड़ियों का ‘कल्याण’ किया है लेकिन कभी किसी खिलाड़ी ने आपका नाम नहीं लिया, इसके जवाब में उसने कहा, “वो चाहें हमारा नाम न लें लेकिन हम आपको एक वीडिया दिखाएंगे, जब वो (कोहली) छोटे से बच्चे थे, बच्चे नहीं कह सकते यूथ थे, तब वो हमारे पास आए थे। वो हो गए, शिखर धवन हो गए, जगदीश नेहरा (शायद आशीष नेहरा) है, जहीर खान है, यूसुफ पठान है (कानी अंगुली दिखाते हुए कि वह पहले ऐसा दिखता था), वकार यूनुस है, ऐसे बहुत सारे प्लेअर हमारे पास आया करते थे और चूंकी हम खुद प्लेअर रहे हैं, इसलिए वह पूछा करते थे कि कैसे खेलना है।”

सनी लियॉन का ऐसी दीवानगी नहीं देखी होगी आपने, उमड़ा हज़ारो का जनसमूह

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बॉलीवुड की अदाकारा सनी लियोनी की एक झलक पाने के लिए यहां हजारों का जनसमुद्र उमड़ पड़ा। वह एक कार्यक्रम में शामिल होने के लिए कोच्चि आई थीं। सड़कों पर लोगों का रेला कुछ इस कदर था कि पुलिस को ट्रैफिक कंट्रोल करने के लिए बहुत दिक्कतों का सामना करना पड़ा। हजारों की संख्या में लोग महात्मा गांधी रोड पर अपनी पसंदीदा अभिनेत्री की एक झलक पाने के लिए उमड़ पड़े।

sunny leone at kochi

प्रशंसकों को हटाने के लिए पुलिस को दो बार बल का भी प्रयोग करना पड़ा। फैंस सनी लियोनी की एक झलक पाने के लिए बस और इमारतों की छतों पर चढ़ गए।

sunny leone kochi photos

अपने स्वागत से अभिभूत सनी लियोनी ने बाद में ट्वीट कर कहा, “मेरे पास कोच्चि के लोगों का शुक्रिया करने के लिए शब्द नहीं है, मैं आपके प्यार और समर्थन के लिए आभार व्यक्त करती हूं। मैं ‘गॉड्स ओन कंट्री’ को कभी नहीं भूल पाउंगी। केरला! धन्यवाद!”

sunny leone public gathering

कोच्चि में सनी लियोन का एक झलक देखने के लिए इकट्ठे हुआ हज़ारो लोग

रिलायंस जिओ दे रहा है 75 रुपये का कैशबैक, ऐसे उठा सकते है आप भी फायदा

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रिलायंस जिओ उपभोक्ताओं के लिए एक और खुशखबरी। जिओ के उपभोक्ता अब अतिरिक्त कैशबैक ऑफर का लाभ उठा सकते है। यह लाभ आप पेटीएम, अमेज़न, फ़ोन पे और मोबिक्विक के द्वारा रिचार्ज कर के उठा सकते है।

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कस्टमर्स इन आठ प्लान (Rs 300 – Rs 309, Rs 349, Rs 399, Rs 509, Rs 999, Rs 1,999, Rs 4,999 and Rs 9,999) मे से किसी भी एक प्लान को चुन सकते है, जिस पर उन्हें कैशबैक मिलेगा। अगर आप 300 रुपये का रिचार्ज करवाते है तो आपको 75 रुपये का कैशबैक मिलेगा। इस ऑफर का फायदा उठाने के लिए आपको काम से काम 300 रुपये का रिचार्ज करवाना होगा। अधिक्तर वेबसाइट पर यह ऑफर केवल एक बार ही मान्य होगा।

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जहाँ एक तरफ पेटीएम 300 रुपये के रिचार्ज पर 15 रुपये का कैशबैक दे रहा है वही दूसरी तरफ अमेज़न 309 रुपये के रिचार्ज पर 99 रुपये का कैशबैक दे रहा है। कैशबैक का लाभ लेने के लिए प्रोमो कोड PAYTMJIO का उपयोग करें। अमेज़न द्वारा किये गए रिचार्ज की कैशबैक राशि आपके अमेज़न पे अकॉउंट मे सात दिन के भीतर क्रेडिट की जाएगी। अमेज़ॅन पर यह ऑफ़र 14 अगस्त से 19 अगस्त 2017 तक ही वैध है।

इस ऑफर के द्वारा आप अधिकतम ३०० रुपये तक का कैशबैक ले सकते है।

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फ्लिपकार्ट फोनपे वॉलेट जियो प्रीपेड रिचार्ज पर 75 रुपये का कैशबैक ऑफर कर रहा है। यह ऑफर 14 अगस्त से 21 अगस्त तक केवल एक बार वैध है। हालांकि, जो ग्राहक 21 जुलाई से 13 अगस्त के बीच जॉयो प्रीपेड रिचार्ज पर पहले से ही 50 रुपये की कैशबैक का लाभ उठा चुके हैं, कैशबैक के लिए पात्र नहीं होंगे। उपयोगकर्ता कैशबैक की राशि को अपने बैंक अकाउंट मे ट्रांसफर नहीं कर सकते।

इन सब से कही आगे मोबिक्विक 399 रुपये के रिचार्ज पर 159 रुपये का कैशबैक ऑफर कर रहा है। जिओ के नए उपभोक्ता रिचार्ज के दौरान ‘JIONEW’ प्रोमो कोड का इस्तेमाल कर सकते है। मौजूदा उपयोगकर्ता प्रोमो कोड ‘JIOMBK’ का उपयोग कर सकते हैं और 59 रुपये का कैशबैक ले सकते हैं।

कोलकाता से अमृतसर जा रही अकाल तख्त एक्सप्रेस में मिला बम, यात्री सुरक्षित

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कोलकाता से अमृतसर जाने वाली रेलगाड़ी अकालतख्त एक्सप्रेस में बुधवार देर रात बम मिलने से अफरा-तफरी मच गई। रेलगाड़ी को लखनऊ से साठ किलोमीटर पहले अकबरगंज के पास रोक दिया गया। वहीं मौके पर बम निरोधक दस्ता पहुंचने के बाद लगभग सात घंटों तक इसकी जांच की गई। अधिकारियों के मुताबिक, यात्री पूरी तरह सुरक्षित हैं।

Bomb Found on Akal Takht Express Train in Amethi

रेलवे सूत्रों के अनुसार, देर रात एक बजे रेलगाड़ी के बी-3 एसी कोच में बम की सूचना से यात्री घबरा गए। हालांकि, सभी यात्री सुरक्षित बताए जा रहे हैं। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर सभी यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकालकर तलाशी शुरू कर दी है।

bomb found on akal takht express

रेलवे के एक अधिकारी ने खबर की पुष्टि करते हुए बताया कि ट्रेन के टॉयलेट में बम बरामद हुआ है। लेकिन किसी के जानमाल को कोई नुकसान नहीं पहुंचा है। सात-आठ घंटे तक तलाशी चली।

रेलवे सुरक्षा बल के एसपी सौमित्र यादव ने कहा कि कम तीव्रता वाला डिवाइस मिला था, जिसे निष्क्रिय करने के बाद ट्रेन को उसके गंतव्य के लिए रवाना कर दिया गया है।

यह ट्रेन कोलकाता से अमृतसर जा रही थी। बम वाली जगह से एक चिट्ठी भी मिली है, जिसमें लिखा है कि आतंकी अबु दुजाना की मौत का बदला अब हिन्दुस्तान को चुकाना पड़ेगा। सूत्रों के मुताबिक, बम का वजन ढाई किलो बताया जा रहा है।

तो इस वजह से चीन नहीं कर सकता भारत पर हमला

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जहाँ एक तरफ चीन भारत को धमकाने से बाज नहीं आ रहा वही दूसरी तरफ भारत का मानना है की चीन भारत पर हमला नहीं कर सकता। भारतीय थिंक टैंक और रक्षा विशेषज्ञ की माने तो भारत चीन के लिए दुनिया का सबसे बड़ा बाजार है। चीन अगर दुनिया का सबसे बड़ा निर्माता है तो भारत दुनिया का सबसे बड़ा खरीददार और अगर चीन को दुनिया की वैश्विक शक्ति के रूप मे उभारना है तो उसको भारत की ही ज़रूरत पड़ेगी। भारत और चीन के बीच करीब 6500 करोड़ डॉलर का द्विपक्षीय व्यापार होता है। चीन भारत से युद्ध कर के अपने आप को आर्थिक रूप से कमजोर नहीं करना चाहेगा।

तो इस वजह से चीन नहीं कर सकता भारत पर हमला

आर्थिक नुकसान: भारत आज दुनिया की नज़र मे एक बहुत बड़ा बाजार है और यह बात चीन भी बखूबी समझता है। भारत विश्व के बाजार मे 40 फीसदी की हिस्सेदारी रखता है। चीन को अपने आप को आर्थिक रूप से संपन्न बनाये रखना एक बहुत बड़ा मुद्दा है। अगर चीन और भारत के बीच युद्ध होता है तो यह भारत के लिए तो नुकसानदायक होगा ही मगर चीन पर इस नुक्सान का असर कई गुना ज़्यादा होगा।

चीन का भारत मे बढ़ता निवेश: बीते 3 सालो मे (एफडीआई) के माध्यम से चीन का भारत मे निवेश कई गुना बढ़ा है। चीन की सैंकड़ो कंपनिया भारत मे काम कर रही है। चीन और भारत के बीच युद्ध इन कंपनियों पर ताला लगाने के लिए एक बड़ी वजह होगी जो चीन कभी नहीं चाहेगा।

वर्ल्ड पावर बनने का लालच: चीन एक अति-महत्वकांशी देश है। चीन को वर्ल्ड पावर बनने का लालच उसको युद्ध की इजाजत नहीं देता। चीन भली-भांति समझता है की आज के युग मे युद्ध से वर्ल्ड लीडर नहीं बना जा सकता और अगर यह युद्ध उसने भारत के साथ लड़ा तो वह कई परेशानियों से घिर सकता है।

1962 के युद्ध से भारत ने सबक लिए हैं

चीन के साथ चल रहे सीमा विवाद के बीच रक्षा मंत्री अरुण जेटली ने बुधवार को कहा कि भारत ने 1962 में चीन के साथ हुए युद्ध से सबक हासिल किया है, साथ ही उन्होंने जोर देकर कहा कि भारतीय सेनाएं अब किसी भी चुनौती का सामना कर सकती हैं। राज्यसभा में भारत छोड़ो आंदोलन की 75वीं वर्षगांठ पर आयोजित विशेष सत्र की शुरुआत करते हुए जेटली ने कहा, “1962 में चीन के साथ हुए युद्ध से हमने सबक लिया है कि हमारे सुरक्षा बलों को पूरी तरह तैयार रहना होगा। तैयारियों का परिणाम हमें 1965 और 1971 में देखने को मिला। हमारी सेनाएं मजबूत होती गई हैं।”

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जेटली ने कहा, “कुछ लोग हमारे देश की संप्रभुता और अखंडता के खिलाफ मंसूबा रखते हैं। लेकिन मुझे पूरा भरोसा है कि हमारे बहादुर सैनिक हमारे देश को सुरक्षित रखने में सक्षम हैं, चाहे चुनौती पूर्वी सीमा पर हो या पश्चिमी सीमा पर।”

उल्लेखनीय है कि 1962 में चीन के साथ हुए युद्ध में भारत को शर्मनाक हार झेलनी पड़ी थी, जबकि 1965 में पाकिस्तान के खिलाफ युद्ध में भारत ने जीत हासिल की थी, वहीं 1971 में भारत के खिलाफ पाकिस्तान को बुरी तरह मुंह की खानी पड़ी थी और पूर्वी पाकिस्तान अलग होकर स्वतंत्र देश बांग्लादेश बना।

भारत और चीन के बीच मध्य जून से सिक्किम सेक्टर में स्थित डोकलाम को लेकर तनाव की स्थिति चल रही है और चीन लगातार भारत को 1962 जैसी हालत करने की धमकी दे रहा है।

जेटली ने अपने संबोधन में देश के सामने दो तरह की चुनौतियों का जिक्र किया। एक तो वामपंथी चरमपंथ और दूसरा सीमा पर।

उन्होंने कहा, “इन परिस्थितियों में पूरे देश को एकसुर में बोलना चाहिए कि हम कैसे देश के संस्थानों को और मजबूत कर सकते हैं और आतंकवाद के खिलाफ कैसे लड़ सकते हैं।”

जेटली ने कहा कि आतंकवाद देश की अखंडता के लिए बहुत बड़ी चुनौती है, क्योंकि इसने एक प्रधानमंत्री (1984 में इंदिरा गांधी) और एक पूर्व प्रधानमंत्री (1991 में राजीव गांधी) की जिंदगियां छीन लीं।

1942 में जब स्वतंत्रता सेनानियों द्वारा भारत छोड़ो आंदोलन शुरू करने पर उनकी विश्वसनीयता के चलते पूरे देश के आंदोलन में शामिल होने का उल्लेख करते हुए जेटली ने कहा कि लोकसेवकों और संस्थानों की वह विश्वसनीयता अब देखने को नहीं मिलती, जिसे फिर से बहाल करने की जरूरत है।

जेटली ने कहा, “आज के दौर के सबसे बड़े सवालों में लोकसेवकों की सत्यनिष्ठा और विश्वसनीयता है। आज के दिन सभी राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों को यह संकल्प लेना चाहिए कि सार्वजनिक जीवन में और कर विभाग, पुलिस, नगर निगम जैसे सार्वजनिक संस्थानों में जनता की विश्वसनीयता को बहाल किया जाना चाहिए और भय का माहौल खत्म होना चाहिए।”

अप्रत्यक्ष तौर पर आपातकाल का संदर्भ देते हुए जेटली ने कहा कि भारतीय लोकतंत्र के समक्ष अनेक चुनौतियां आईं, खासकर 70 के दशक में, लेकिन हमारा लोकतंत्र हर चुनौतियों से लड़ता हुआ मजबूत होता गया है।

उन्होंने यह भी कहा कि न्यायपालिका और विधायिका लोकतंत्र के दो खंभे हैं और उन्हें आपस में उलझने से बचना चाहिए।

जेटली ने कहा, “न्यायपालिका और विधायिका के बीच की लक्ष्मण रेखा की पवित्रता को कायम रखना होगा, जो कई बार धूमिल होती नजर आती है।”

चीनी अखबार की धमकी – “भारत चीन को नज़रअंदाज़ न करे, वर्ना युद्ध होकर रहेगा”

भारत अगर यह सोच रहा है कि डोकलाम में चल रहे सीमा विवाद को लेकर भड़काने के बावजूद चीन कोई प्रतिक्रिया नहीं करेगा तो वह 1962 की तरह एकबार फिर भ्रम में है। चीन के एक दैनिक समाचार पत्र में मंगलवार को प्रकाशित स्तंभ में यह बात कही गई है।

Chinese foreign ministry spokesperson

सरकारी समाचार पत्र ‘ग्लोबल टाइम्स’ ने अपने संपादकीय में लिखा है कि अगर भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ‘चीन की धमकियों‘ को नजरअंदाज करते रहे तो चीन की ओर से सैन्य कार्रवाई की संभावना को टाला नहीं जा सकता।

ग्लोबल टाइम्स का यह संपादकीय भारत से आई उस खबर के जवाब में है, जिसमें कहा गया है कि भारतीय अधिकारियों को विश्वास है कि चीन, भारत के साथ युद्ध का जोखिम नहीं लेगा। ग्लोबल टाइम्स इससे पहले भी 1962 के युद्ध का उदाहरण पेश कर चुका है।

मंगलवार को प्रकाशित संपादकीय में कहा गया है, “भारत ने 1962 में भी भारत और चीन सीमा पर लगातार भड़काने का काम किया था। उस समय जवाहरलाल नेहरू की सरकार को पूरा भरोसा था कि चीन दोबारा हमला नहीं करेगा। हालांकि नेहरू सरकार ने घरेलू एवं कूटनीतिक स्तर पर जूझ रही चीन सरकार की क्षेत्रीय अखंडता को लेकर दृढ़ता को कमतर करके आंका था।”

संपादकीय में आगे कहा गया है, “55 वर्ष बीत चुके हैं, लेकिन भारत सरकार हमेशा की तरह अब भी भ्रम में है। 1962 के युद्ध से मिला सबक वे आधी सदी तक भी याद नहीं रख पाए। अगर नरेंद्र मोदी की सरकार नियंत्रण से बाहर जा रही स्थिति को लेकर दी जा रही चेतावनी के प्रति बेखबर रही, तो चीन को प्रतिक्रिया में कार्रवाई करने से रोकना संभव नहीं हो सकेगा।”

सिक्किम सेक्टर के डोकलाम में करीब दो महीने से बनी तनाव की स्थिति में जरा भी कमी नहीं आई है और दोनों देशों की सेनाओं के बीच गतिरोध जारी है।

चीन की सरकार, चीनी मीडिया और चीन के शीर्ष वैचारिक संगठन लगातार भारत को युद्ध की धमकी देने में लगे हुए हैं।

वहीं डोकलाम सीमा विवाद पर भारत की प्रतिक्रिया नपी-तुली रही है और समस्या के समाधान के लिए भारत हमेशा वार्ता की मांग करता रहा है।

दूसरी ओर बीजिंग का कहना है कि किसी भी तरह की वार्ता तभी हो सकती है, जब भारत डोकलाम से अपनी सेना वापस हटाए।

चीन से कूटनीतिक संपर्क जारी रखेगा भारत : सुषमा स्वराज

विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने गुरुवार को कहा कि डोकलाम गतिरोध का ‘परस्पर स्वीकार्य समाधान’ खोजने के लिए भारत चीन के साथ कूटनीतिक माध्यमों से लगातार संपर्क बनाए रखेगा और साथ ही भूटान के साथ समन्वय व परामर्श जारी रखेगा। राज्यसभा में भारत की विदेश नीति पर एक चर्चा का उत्तर देते हुए सुषमा स्वराज ने विशेष तौर पर सिक्किम क्षेत्र के गतिरोध पर टिप्पणी की। स्वराज ने कहा, “चीन के साथ लगी सीमा को अंतिम रूप नहीं दिया गया है और कहा कि बुधवार को चीन द्वारा जारी दस्तावेज में भारत-चीन सीमा से जुड़े मुद्दे पर पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के रुख का चयनात्मक हवाला दिया गया है।”

sushma swaraj speech on china

सुषमा स्वराज ने कहा, “उस पत्र का एक पूर्ण व सटीक विवरण यह भी सामने आया है कि प्रधानमंत्री का दावा स्पष्ट रूप से सीमा रेखा पर आधारित था, जैसा कि हमारे पहले प्रकाशित नक्शे में दिखाया गया है।”

मंत्री ने कहा, “अपने हाल के दस्तावेज में चीनी पक्ष ने भारत-चीन सीमा क्षेत्र में शांति बनाए रखने की प्रतिबद्धता जाहिर की है। भारत का हमेशा मानना है कि भारत-चीन सीमा पर शांति हमारे द्विपक्षीय संबंधों के सुचारु विकास के लिए महत्वपूर्ण शर्त है।”

उन्होंने कहा, “हम कूटनीतिक माध्यमों के जरिए चीनी पक्ष से अस्ताना में अपने नेताओं में हुए सहमति पर पारस्परिक स्वीकार्य हल के लिए लगातार संपर्क जारी रखेंगे। मैंने सदन की भावना को सहयोगात्मक महसूस किया है।”

उन्होंने कहा, “इस संदर्भ में भूटान के साथ पारंपरिक व अद्वितीय दोस्ती बनाए रखते हुए हम भूटान की राजशाही के साथ भी गहन परामर्श व समन्वय बनाए रखेंगे।”

भारत से सैन्य संघर्ष की उलटी गिनती शुरू : चीनी अखबार

चीन के एक समाचार-पत्र ने बुधवार को लिखा है कि भारत और चीन के बीच सैन्य संघर्ष की उलटी गिनती शुरू हो चुकी है और इससे पहले की देर हो जाए, नई दिल्ली को समझदारी दिखाते हुए डोकलाम से अपने सैनिक वापस बुला लेने चाहिए।

चीन के सरकारी स्वामित्व वाले समाचार पत्र ‘चाइना डेली’ में बुधवार को प्रकाशित संपादकीय में भारत को आगाह करते हुए कहा गया है कि ‘उलटी गिनती शुरू हो चुकी है’।

समाचार पत्र लिखता है, “भारत अगर डोकलाम से अपने सैनिकों को वापस नहीं बुलाता है तो इसका जिम्मेदार वह खुद होगा।”

जून के मध्य में सिक्किम सेक्टर के डोकलाम में सीमा विवाद को लेकर दोनों देशों के सैनिकों के बीच तकरार की स्थिति बनी हुई है और तब से चीनी मीडिया लगातार भड़काऊ लेखों के जरिए भारत को उकसाने और धमकाने में लगा हुआ है।

चाइना डेली अपने संपादकीय में कहता है, “दोनों देशों की सेनाओं के बीच संघर्ष की उलटी गिनती शुरू हो चुकी है। समय लगातार बीतता जा रहा है और ऐसा लग रहा है कि अवश्यंभावी सैन्य संघर्ष को टाला नहीं जा सकेगा। दोनों देशों की सेनाओं के बीच गतिरोध सातवें सप्ताह में प्रवेश कर चुका है और इसके साथ ही शांतिपूर्ण समाधान के दरवाजे लगभग बंद हो चुके हैं।”

चीन ने भी डोकलाम से अपने सैनिकों को वापस न बुलाने पर गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी है। चीन सिक्किम सेक्टर में भारत, चीन और भूटान की तिहरी सीमा से लगे डोकलाम पर अपना अधिकार जताता रहा है और वह इसे डोंगलांग कहता है।

वहीं भारत और भूटान डोकलाम को थिंपू का हिस्सा बताते रहे हैं और भारत ने डोकलाम से दोनों देशों की सेनाएं एकसाथ वापस बुलाने का प्रस्ताव रखा है। हालांकि बीजिंग ने इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया है।

डोकलाम हमेशा चीन के अधिकार क्षेत्र में रहा : मंत्री

चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने सोमवार को कहा कि डोकलाम क्षेत्र में कोई क्षेत्रीय विवाद नहीं रहा है। समाचार एजेंसी सिन्हुआ के मुताबिक, मंत्रालय के प्रवक्ता लू कांग ने कहा, “यह कहना सही होगा कि क्षेत्रीय विवाद शांतिपूर्ण तरीके से हल होने चाहिए, लेकिन मैं कहना चाहता हूं कि इस तरह की बात डोकलाम की हालत पर लागू नहीं होती, क्योंकि इस स्थल पर अब कोई क्षेत्रीय विवाद नहीं है, जहां यह घटना हुई है।”

doklam plateau bhutan

भारत और चीन के जवानों के बीच डोकलाम में गतिरोध बना हुआ है। डोकलाम भारत, भूटान और चीन के बीच तिराहा है। चीन डोकलाम को अपना बताता है, लेकिन भारत और भूटान का कहना है कि यह भूटान का है।

भारत ने जून में चीनी सेना को डोकलाम में सड़क निर्माण करने से रोका। इससे भारत और चीन आमने-सामने आ गए।

लू ने कहा, “चीन भारत सीमा के सिक्किम क्षेत्र का निर्धारण है, जिसे चीन और भारत मान्यता देता है।”

उन्होंने कहा, “चीन-भारत सीमा के परिभाषित सिक्किम क्षेत्र में भारतीय जवानों की अवैध घुसपैठ हो रही है। यह पहले के दोनों पक्षों के बीच गतिरोध से अलग है।”

उन्होंने कहा, “चीन की मंशा चीन-भारत सीमा पर शांति और स्थिरता बनाए रखने की है, लेकिन चीन अपनी संप्रभुता से समझौता नहीं करेगा।”

उन्होंने कहा कि इस घटना के लिए पूरी तरह से भारतीय पक्ष जिम्मेदार है, और हालात को बढ़ाने से बचने का आग्रह करता है।

भारत ने चीन पर आरोप लगाया है कि वह तिराहे पर यथास्थिति को बदलने का प्रयास कर रहा है और भारत मामले को कूटनीतिक रूप से हल करना चाहता है।

 

लालू का नीतीश पर हमला, भाजपा के साथ मिलकर की ‘भस्मासुर’ ने साजिश

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बिहार में महागठबंधन टूटने के बाद राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव ने गुरुवार को कहा कि केंद्रीय जांच एंजेसियों द्वारा उनके परिवार के खिलाफ भ्रष्टाचार के संबंध में मामला दर्ज कराने के लिए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के साथ मिलकर ‘साजिश रची।’ चारा घोटाला मामले में यहां केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की अदालत में पेश होने के बाद लालू प्रसाद ने संवाददाताओं से कहा, “नीतीश कुमार ने बिहार के लोगों को धोखा दिया है। मैं आरोप लगाता हूं कि नीतीश कुमार ने मेरे और मेरे परिवार के खिलाफ सीबीआई में मामला दर्ज कराने के लिए भाजपा के साथ गठजोड़ किया।”

Lalu Yadav and Nitish Kumar
उन्होंने कहा कि उप मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने वाले सुशील मोदी को उनके परिवार के सदस्यों की छवि खराब करने के लिए अभियान चलाने के लिए कहा गया।

सीबीआई, प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और आयकर विभाग ने लालू प्रसाद की पत्नी राबड़ी देवी सहित उनके छोटे बेटे बिहार के पूर्व उप मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव व बेटी मीसा भारती के खिलाफ भ्रष्टाचार का मामला दर्ज किया है।

लालू ने नीतीश कुमार को ‘भस्मासुर’ बताते हुए कहा, “मेरी पार्टी के राज्य में अकेले सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरने के बावजूद मैंने उन्हें मुख्यमंत्री बनाया। मैं स्वार्थी नहीं था।”

नीतीश कुमार और सुशील मोदी के शपथ लेने के तुरंत बाद लालू यादव ने यह टिप्पणी की।

उन्होंने दावा किया कि जब वह (लालू) आरोपों का सामना कर रहे थे, तो उनके जानने वाले लोगों ने उनसे सहानुभूति जताई, लेकिन नीतीश कुमार ने कभी ऐसा कुछ नहीं किया। लालू ने कहा कि सब कुछ पहले से तय था।

उन्होंने कहा, “वह (नीतीश) बहुत बड़े अवसरवादी हैं। हमें भाजपा और आरएसएस के खिलाफ जनादेश मिला था और साथ मिलकर हमने उन्हें (2015 विधान सभा चुनाव में) बिहार से खाली हाथ लौटा दिया था।”

लालू ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह उनसे जलते हैं। उन्होंने कहा कि वे जानते हैं कि उनकी नींव को नहीं हिलाया जा सकता। लालू ने कहा कि उन्होंने नीतीश के लिए कभी कोई समस्या पैदा नहीं की।

सैकड़ो सांसदों के साथ तेज प्रताप उतरे सड़क पर, राज्यपाल के खिलाफ धरना

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जदयू-भाजपा गठजोड़ के पास भले ही बिहार विधानसभा में अपना बहुमत साबित करने के लिए संख्या बल हो लेकिन राजद भी यह लड़ाई लड़े बगैर छोड़ देने के मूड में नहीं दिख रही क्योंकि तेजस्वी यादव ने आज रात कहा कि वह अगली सरकार बनाने का दावा पेश करेंगे।

Tejashwi Yadav marches towards Raj Bhavan

तेजस्वी ने ट्वीट किया, ‘‘राज्यपाल से मिलने का समय मांगा है। सबसे बड़ी पार्टी होने के नाते अगली सरकार बनाने का दावा पेश करेंगे। जदयू के उन विधायकों का भी समर्थन मिलेगा जो भाजपा उम्मीदवारों को हरा कर जीते हैं।’’ हालांकि, संख्याबल उनके खिलाफ है। जदयू और राजग के सहयोगियों को मिला कर 243 सदस्यीय विधानसभा में 129 विधायक हैं जो कि जादुई आंकड़े 122 से सात अधिक है।

राजद के 80 विधायक हैं और यदि कांग्रेस के 27 और भाकपा माले के तीन विधायक तेजस्वी का समर्थन करने का निर्णय करते हैं तो भी उनकी संख्या 110 होगी। चार निर्दलीय विधायक हैं, जो उस गठबंधन को समर्थन दे सकते हैं जिसके पास बहुमत होगा।

नीतीश ने तोड़ा महागठबंधन, भाजपा के साथ बनाएंगे सरकार

नीतीश कुमार के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने के साथ ही बुधवार को बिहार की राजनीति में जैसे भूचाल आ गया। राष्ट्रीय जनता दल (राजद) और कांग्रेस के साथ 20 महीने पुराने महागठबंधन से खुद को अलग करते हुए नीतीश ने राज्यपाल केसरीनाथ त्रिपाठी को अपना इस्तीफा सौंप दिया। नीतीश के इस्तीफे की घोषणा के कुछ ही देर बाद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने उन्हें बिना शर्त समर्थन देने की घोषणा भी कर दी है और गुरुवार को नीतीश नई सरकार गठित करने का दावा पेश कर सकते हैं।

nitish kumar quits as bihar cm

इस्तीफे की घोषणा के कुछ ही देर बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट कर नीतीश को बधाई दी।

मोदी ने ट्वीट किया, “भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई में जुड़ने के लिए नीतीश कुमार जी को बहुत-बहुत बधाई। सवा सौ करोड़ नागरिक ईमानदारी का स्वागत और समर्थन कर रहे हैं। देश के, विशेष रूप से बिहार के उज्ज्वल भविष्य के लिए राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर भ्रष्टाचार के खिलाफ एक होकर लड़ना, आज देश और समय की मांग है।”

नीतीश ने भी जवाबी ट्वीट कर मोदी का धन्यवाद व्यक्त किया।

इस बीच नीतीश के साथ गठबंधन सरकार में उप-मुख्यमंत्री रह चुके भाजपा के वरिष्ठ नेता सुशील कुमार मोदी ने कहा कि नीतीश के नेतृत्व में बनने वाली सरकार में भाजपा शामिल होगी।

sushil kumar bihar deputy chief minister

सुशील मोदी ने यहां कहा, “बिहार में नीतीश के नेतृत्व में अगर कोई भी सरकार बनती है, तो भाजपा उसका समर्थन करेगी। भाजपा विधानमंडल दल नीतीश कुमार को बतौर नेता विश्वास प्रकट करती है।”

सुशील ने बताया कि इसकी सूचना टेलीफोन के जरिए नीतीश कुमार को भी दे दी है, जिसे उन्होंने स्वीकार कर लिया है। उन्होंने कहा कि भाजपा भी सरकार में शामिल होगी।

उन्होंने बताया कि जल्द ही इस फैसले से राज्यपाल को भी अवगत करा दिया जाएगा।

मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद जनता दल (युनाइटेड) के अध्यक्ष नीतीश ने कहा कि जितना संभव हो सका, उन्होंने गठबंधन धर्म का पालन करने की कोशिश की, लेकिन बीते घटनाक्रम में जो चीजें सामने आईं उसमें काम करना मुश्किल हो गया था।

नीतीश ने कहा, “मैंने इन 20 महीनों में जितना हो सका, सरकार चलाने की कोशिश की। लेकिन इस बीच जो हालात बने, जिस तरह की चीजें उभरकर सामने आईं, उसमें काम करना, नेतृत्व करना संभव नहीं रह गया था।”

भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरे राजद नेता तेजस्वी यादव प्रकरण पर नीतीश ने कहा, “हमने कभी किसी का इस्तीफा नहीं मांगा था, बल्कि उनका पक्ष मांगा था। मैंने कहा कि जो भी आरेाप लगे हैं, उसे ‘एक्सप्लेन’ कीजिए। वो नहीं हुआ। जब मुझे ऐसा लग गया कि वे कुछ कहने की स्थिति में नहीं हैं, तो ऐसी स्थिति में मैं तो जवाब नहीं दे सकता। मैं सरकार का नेतृत्व कर रहा हूं। लेकिन सरकार के अंदर के व्यक्ति के बारे में कुछ बातें कही जाती हैं और मैं उस पर कहने की स्थिति में नहीं हूं तो ऐसी स्थिति में इस सरकार को चलाने का, मेरे हिसाब से कोई आधार नहीं है।”

नीतीश ने कहा कि उन्होंने अंतर्रात्मा की आवाज पर अपना इस्तीफा दिया है।

नीतीश ने कहा, “पूरे माहौल को देखने के बाद, मुझे लगा कि मेरे जैसे व्यक्ति के लिए..यह मेरे अंतर्रात्मा की आवाज है।”

नीतीश ने नोटबंदी और राष्ट्रपति चुनाव के दौरान अपनी पार्टी के पक्ष पर सवाल उठाए जाने का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा, “हमने नोटबंदी का समर्थन किया, तब हम पर सवाल उठाए गए। हमारे बिहार के राज्यपाल राष्ट्रपति बनने वाले थे, हमने उनका समर्थन किया, तब भी हम पर सवाल उठाए गए। इस तरह काम करना मेरे स्वभाव के विपरीत है।”

उल्लेखनीय है कि 243 सदस्यीय बिहार विधानसभा में जद (यू) और भाजपा को मिलाकर 129 विधायक हो जाएंगे, जो जरूरी बहुमत 124 से अधिक है।

जियोनी ए1 प्लस लॉन्च : 20 मेगापिक्सल का सेल्फी कैमरा व ज़बरदस्त स्पेशिफिकेशन

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भारत में ‘ए1’ स्मार्टफोन को अच्छी प्रतिक्रिया मिलने के बाद चीनी स्मार्टफोन निर्माता जियोनी ने ‘ए1 प्लस’ लांच किया है जो पूर्ववर्ती से बेहतर स्पेशिफिकेशन और कैमरा क्षमता वाला है।

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मध्यम खंड का यह डिवाइस अपने कव्र्ड किनारों के साथ देखने में शानदार है। इसका डिस्प्ले 6 इंच का है और इसमें 2.5डी ग्लास लगा है।

इस डिवाइस में पिछले हिस्से में ड्यूअल (13 मेगापिक्सल और 5 मेगापिक्सल) का कैमरा सिस्टम है, जिसके साथ एलईडी फ्लैश दिया गया है। इसका होम बटन ही फिंगरप्रिंट सेंसर का काम भी करता है।

इस डिवाइस के सामने के हिस्से में 20 मेगापिक्सल का सेल्फी कैमरा फ्लैश के साथ दिया गया है, ताकि कम रोशनी में भी अच्छी तस्वीरें खींची जा सके।

इस में 2.5 गीगाहट्र्ज स्पीड का ऑक्टाकोर कोर्टेक्स ए 53 प्रोसेसर है, जिसके साथ 4 जीबी रैम और 64 जीबी इंटरनल स्टोरेज है। यह एंड्रायड नूगा 7.0 ऑपरेटिंग सिस्टम पर चलता है जिस पर आधारित इसका इनहाउस एमिगो 4.0 यूआई (यूजर इंटरफेस) है।

इस फोन में 4,550 एमएएच की बैटरी है जो अल्ट्रा फास्ट चार्जिग का समर्थन करता है।

इस फोन में एक पैनिक बटन भी है जो होम बटन को लगातार तीन बार दबाने पर सक्रिय होता है।

‘ए1 प्लस’ को कंपनी किसी भी वक्त भारतीय बाजार में लांच कर सकती है। कंपनी ने इसकी कीमत का खुलासा नहीं किया है, हालांकि मध्यम खंड में यह अच्छा स्मार्टफोन है।

13 दिन से फ्रीज मे रखी है डेड बॉडी, गैंगस्टर आनंदपाल के एनकाउंटर के विरोध मे राजस्थान मे लगा कर्फ्यू

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पुलिस व भीड़ के बीच गोलीबारी में एक व्यक्ति की मौत होने के बाद राजस्थान के गांव सनवर्दा में गुरुवार को स्थिति तनावपूर्ण रही। पुलिस ने कहा कि बुधवार की हिंसा के बाद नागौर जिले के सनवर्दा गांव में कर्फ्यू लगाया गया।

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पुलिस द्वारा जून में एक गैंगस्टर के मारे जाने के खिलाफ विरोध जताने के लिए राज्य भर से हजारों लोग इस गांव में बुधवार को जमा हुए थे। नागौर से एक अधिकारी ने टेलीफोन पर बताया, “स्थिति तनावपूर्ण है, लेकिन नियंत्रण में है।”

अधिकारी ने कहा कि सनवर्दा गांव में बुधवार की रात भीड़ ने पुलिस पर पथराव किया व हथियार छीन लिए और एक पुलिस वाहन को आग लगा दी। इसमें 30 पुलिसकर्मियों सहित 33 लोग घायल हो गए।

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अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (कानून एवं व्यवस्था) एन.आर.के. रेड्डी ने आईएएनएस से कहा कि इसमें एक पुलिस अधीक्षक भी घायल हुए हैं।

रेड्डी ने कहा, “हरियाणा से आए एक व्यक्ति कि बुधवार को हुई गोलीबारी में मौत हो गई। लेकिन, किसने उस पर गोली चलाई, यह जांच का विषय है।” उन्होंने कहा कि पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े।

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प्रत्यक्षदर्शियों ने कहा कि पांच से छह प्रदर्शनकारी भी घायल हुए, लेकिन पुलिस ने इससे इनकार किया। तीन गंभीर रूप से घायल पुलिस कर्मियों को जयपुर अस्पताल रेफर किया गया है।

भीड़ ने 24 जून को गैंगस्टर आनंदपाल सिंह की मौत की केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) से जांच कराने की मांग की।

सिंह के परिवार का दावा है कि उसके द्वारा पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण करने की इच्छा जाहिर करने के बावजूद उसे मार दिया गया। उन्होंने आनंद की हत्या में राजनीतिक साजिश होने का आरोप लगाया।

पुलिस ने कहा कि इलाके में बुधवार की रात को इंटरनेट सेवा बंद कर दी गई। इसे गुरुवार को बढ़ाकर चुरु व सीकर जिले में भी कर दिया गया।

एक पुलिस अधिकारी ने कहा, “हमने बुधवार से 100 से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया है।”